JPSC-JSSC भर्ती परीक्षा घोटाला: CID जांच का दायरा बढ़ा, गिरिडीह और कोडरमा से जुड़े तार

JPSC-JSSC भर्ती परीक्षा घोटाले में CID का दायरा बढ़ा, कोडरमा से दो मध्यस्थ हिरासत में, गिरिडीह कनेक्शन सामने आया और करोड़ों के परीक्षा सिंडिकेट की जांच तेज हुई।

News Aroma
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रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की नियुक्ति परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर सीआईडी (CID) की जांच अब और तेज हो गई है। इस बड़े फर्जीवाड़े का नया अड्डा गिरिडीह, कोडरमा और आसपास के इलाकों से जुड़ता नजर आ रहा है, जहां से सीआईडी ने कई आरोपियों और बिचौलियों पर शिकंजा कसा है।
कोडरमा से दो मध्यस्थ हिरासत में
मामले की जांच के सिलसिले में सीआईडी की टीमों ने कोडरमा जिले में देर रात छापेमारी कर दो युवकों संदीप कुमार पूर्णानगर और राजेश प्रसाद यादव गोलवाढाब डोमचांच को हिरासत में लिया है। जांच में सामने आया है कि दोनों आपस में दोस्त हैं और अभ्यर्थियों तथा सिंडिकेट के बीच मध्यस्थता (सेटिंग) का काम करते थे। राजेश यादव का यूट्यूब चैनल और संदीप का एक ट्रस्ट संचालित होने की बात सामने आई है।
मास्टरमाइंड अभय तिवारी और सिंडिकेट का पर्दाफाश
जांच के अनुसार इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी अभय तिवारी (पूर्व में TDPL कंपनी का कर्मचारी और वर्तमान में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर) है, जिसने कंप्यूटर और नेटवर्किंग की डिग्री हासिल करने के बाद परीक्षा सिंडिकेट तैयार किया। उसने धोखाधड़ी और साठगांठ के जरिए खुद तो कई परीक्षाएं निकाली हीं, साथ ही अपनी पत्नी श्वेता गुप्ता और साले/रिश्तेदारों को भी गलत तरीकों से पास करवाकर नौकरी दिलाई। अदालत ने हाल ही में श्वेता गुप्ता और पवन कुमार सिंह की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
जांच में खुलासा हुआ है कि इस गैंग का नेटवर्क 2005 की यूपी पुलिस दारोगा भर्ती से लेकर झारखंड की विभिन्न सिविल और स्नातक स्तरीय परीक्षाओं (JSSC-CGL) तक फैला हुआ था। आरोपी गारंटीड सेलेक्शन के नाम पर अभ्यर्थियों से 25 से 40 लाख रुपये तक वसूलते थे और परीक्षा से पहले सवाल-जवाब रटवाए जाते थे। फिलहाल सीआईडी गिरफ्तार आरोपियों, संदिग्ध कोचिंग संचालकों और अन्य संदिग्धों को नोटिस भेजकर पूछताछ कर रही है ताकि इस व्यापक सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके।

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