केन-बेतवा: प्रदर्शन स्थल से आंदोलनकारी हटाए गए, आंदोलन के नेतृत्वकर्ता ने कहा- अनशन नहीं तोड़ेंगे

केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में अनशन कर रहे प्रदर्शनकारियों को प्रशासन ने बढ़ते जलस्तर का हवाला देकर हटाया। आंदोलन जारी रखने का दावा, पुनर्वास पैकेज को लेकर विवाद तेज।

Razi Ahmad
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Ken Betwa Link Project : मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में पिछले 15 दिन से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों को पुलिस तथा प्रशासन ने बरसाती मौसम और बढ़ते जलस्तर के खतरे का हवाला देते हुए रविवार सुबह प्रदर्शन स्थल से हटा दिया।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने इस शांतिपूर्ण आंदोलन को ‘‘बर्बर तरीके’’ से कुचलने का प्रयास किया है लेकिन इसके बावजूद उनका आमरण अनशन और आंदोलन जारी है।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘अब चाहे मेरी जान ही चली जाए, अनशन नहीं तोड़ेंगे। बोतल नहीं लगाएंगे, सिर्फ पानी और नींबू पानी पिएंगे।’’

भटनागर ने कहा, ‘‘पुलिस ने सुबह बर्बर कार्रवाई की। महिलाओं के साथ मारपीट की गई, सांकेतिक चिताओं और फांसी के स्थान को तोड़ दिया गया। प्रशासन अपनी बर्बरता से बाज नहीं आया। प्रशासन को लगता है कि मेरा आमरण अनशन खत्म हो गया है तो ऐसा नहीं है। उन्होंने आंदोलन को कुचला है। आखिरी सांस तक मेरा आमरण अनशन और आंदोलन जारी रहेगा।’’

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी आंदोलनकारियों को प्रदर्शन स्थल से ‘‘जबरन’’ हटाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने असहमति की हर आवाज़ को कुचलना अपने शासन का ‘मॉडल’ बना लिया है क्योंकि वह प्रदर्शनकारियों से डरती है।

प्रदर्शनकारियों ने इससे पहले यह आरोप भी लगाया था कि पुलिस ने भटनागर को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से सभी को ‘‘प्रेम व शांतिपूर्ण तरीके’’ से उनके घरों तक पहुंचा दिया गया है।

प्रदर्शनकारियों ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास से संबंधित वादे अब तक पूरे नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए तीन जुलाई को अनिश्चितकालीन अनशन कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे शरू किया था।

जिलाधिकारी पार्थ जायसवाल ने पत्रकारों से कहा कि बराना नदी और आसपास के क्षेत्र में लगातार बारिश से जलस्तर बढ़ गया है, जिससे आंदोलन स्थल पर मौजूद लोगों की जान-माल की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा पैदा हो गया था, इसलिए उन्हें हटाना जरूरी था।

उन्होंने बल प्रयोग करने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सभी आंदोलनकारियों को वहां से सुरक्षित तरीके से हटाकर बसों के माध्यम से उनके गांव भेजा गया है।

जायसवाल ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग विस्थापन पैकेज पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 12.5 लाख रुपये प्रति पात्र परिवार करने की है और राज्य मंत्रिमंडल द्वारा पुनर्वास पैकेज में बढ़ोतरी को सिद्धांततः स्वीकृति दी जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि इसका आदेश अगले कुछ दिन में जारी होने की संभावना है और आदेश जारी होते ही पन्ना जिले के प्रभावित परिवारों के दावों के सर्वे और भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।