2020 में भी हुआ था लॉकडाउन, लेकिन इस तरह से आम लोगों को नहीं किया गया था परेशान: आशा लकड़ा

रांची: रांची नगर निगम की मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि संपूर्ण लॉक डाउन में ई-पास की अनिवार्यता ने राज्य सरकार का मजाक बना दिया है।

ई-पास की अनिवार्यता अति आवश्यक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होना चाहिए न कि सब्जी, फल, राशन व दवा की खरीदारी के लिए।

मेयर आशा लकड़ा ने रविवार को यह बात कही। राज्य सरकार की ओर से 16 से 27 मई तक घोषित सम्पूर्ण लॉकडाउन के पहले दिन मेयर शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर ई-पास को लेकर आम लोगों को हो रही परेशानी का जायजा ले रही थीं।

राज्य सरकार को शिक्षित व अशिक्षित वर्ग को ध्यान में रखते हुए ई-पास की अनिवार्यता लागू करनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि सम्पूर्ण लॉकडाउन के पहले दिन ई-पास नहीं होने पर कई दो पहिया व चार पहिया (कार) वाहन मालिकों का पुलिस ने चालान काटा।

ई-पास की अनिवार्यता के कारण कई लोग परेशान हुए। वहीं दूसरी ओर, कई लोगों ने बताया कि उनके पास एंड्रॉयड फोन है, लेकिन ई-पास से संबंधित वेबसाइट नहीं खुल रहा है।

कुछ लोगों ने यह भी बताया कि राज्य सरकार की यह कैसी नीति है, जिसमें सब्जी, फल, राशन या दवा खरीदने के लिए बार-बार ई-पास की आवश्यकता हो।

2020 में लॉकडाउन के दौरान इस प्रकार आम लोगों को सब्जी, फल, दवा या राशन की खरीदारी करने के लिए परेशान नहीं किया गया था।

मेयर ने कहा कि लॉक डाउन में इंटरनेट कैफ़े भी बंद है। कई लोगों के पास एंड्रॉयड फ़ोन की सुविधा तो उपलब्ध है, लेकिन उन्हें ई-पास कैसे जेनेरेट होगा, इसकी जानकारी नहीं है।

कोरोना संक्रमण से लोग भयभीत हैं। 2020 के बाद 2021 में आम लोग यह भी समझ चुके हैं कि लॉक डाउन का मतलब क्या होता है।

राज्य सरकार ने कोरोना संक्रमण के चेन को तोड़ने के  लिए 16 से 27 मई तक सम्पूर्ण लॉक डाउन की घोषणा की है, यह सराहनीय है।

लेकिन लॉक डाउन के नाम पर आम लोगों को परेशान करना मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सब्जी, फल, राशन व दवा आदि की खरीदारी के लिए भी ई-पास अनिवार्य कर दिया है।

ऐसे में कई लोग जिन्हें ई-पास जेनेरेट करने की जानकारी है, वे बार-बार सब्जी, फल, राशन या दवा की खरीदारी के नाम पर ई-पास का दुरुपयोग करेंगे।

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