70 साल का गौरव: मालती धारी कॉलेज के स्थापना दिवस पर शिक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान, विकास के लिए हरसंभव मदद का भरोसा

मालती धारी कॉलेज के 70वें स्थापना दिवस पर शिक्षा मंत्री संजय कुमार सिंह ने विकास परियोजनाओं को समर्थन का भरोसा दिया और ग्रामीण उच्च शिक्षा में संस्थान के योगदान की सराहना की।

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नौबतपुर (पटना) : मालती धारी कॉलेज नौबतपुर ने मंगलवार को अपना 70वां स्थापना दिवस पूरे उत्साह और गरिमापूर्ण माहौल में मनाया। इस अवसर पर बिहार सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री संजय कुमार सिंह टाइगरमुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अखिलेश कुमार ने की। समारोह में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) प्रो. अबू बकर, तरेत पाली आश्रम के मुख्य महंथ स्वामी सुदर्शनाचार्य, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष मोहन सिंह, पूर्व प्राचार्य प्रो. बंगाली सिंह के ज्येष्ठ पुत्र डॉ. राजीव कुमार सिन्हा, राम कृष्ण द्वारका कॉलेज की प्राचार्या प्रो. सीता सिन्हा, कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. कन्हैया प्रसाद सिंहा तथा रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र देकर स्वागत किया गया।

अपने स्वागत भाषण में प्राचार्य डॉ. अखिलेश कुमार ने कॉलेज की 70 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, शैक्षणिक उपलब्धियों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप किए जा रहे नवाचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि मालती धारी कॉलेज ने ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने की अपील की। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि कॉलेज के समग्र विकास के लिए प्राचार्य द्वारा प्रस्तुत हर परियोजना पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्राचार्य डॉ. अखिलेश कुमार कॉलेज के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। उनका उत्साह बढ़ाते हुए मंत्री ने छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध पंक्तियां भी सुनाईं-

 वह पथ क्या, पथिक कुशलता क्या?

जिस पथ पर बिखरे शूल न हों।

नाविक की धैर्य परीक्षा क्या,

जब धाराएं प्रतिकूल न हों।

समारोह के दौरान महाविद्यालय की विभिन्न इकाइयों की उपलब्धियों को भी साझा किया गया। छात्र संसद के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. राजीव कुमार रंजन, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. कुमारी भारती, राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. श्वेता बाला तथा क्रीड़ा प्रभारी डॉ. गोरख राम के नेतृत्व में संचालित गतिविधियों की अतिथियों ने सराहना की और उन्हें सम्मानित भी किया।

इस खास मौके पर प्राचार्य डॉ. अखिलेश कुमार के संपादकत्व में प्रकाशित स्मारिका और डॉ. कुमारी भारती की पुस्तक “विकसित भारत 2047 और भारतीय ज्ञान परंपरा का अंतर्संबंध” का अतिथियों ने लोकार्पण किया। वक्ताओं ने इस पुस्तक को विकसित भारत की परिकल्पना और भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित महत्वपूर्ण अकादमिक कृति बताया।

कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. बंगाली सिंह के ज्येष्ठ पुत्र और पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिन्हा ने अपने बचपन की यादें साझा करते हुए भावुक कर देने वाली बातें कहीं। उन्होंने बताया कि उनके पिता वर्ष 1956 में पूर्णिया कॉलेज की स्थायी नौकरी छोड़कर नौबतपुर में प्राचार्य बनकर आए थे। नियुक्ति के बाद जब उन्होंने कॉलेज प्रबंधन से पूछा कि कॉलेज कहां है, तब संस्थापक सचिव एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धेश्वरी प्रसाद सिंह ने कहा, “कॉलेज तो आपको खड़ा करना है।”

उन्होंने बताया कि उनके पिता गांव-गांव घूमकर लोगों से आर्थिक सहयोग जुटाते थे और पूर्णिया से बचाकर लाए 4,000 रुपये भी कॉलेज निर्माण में लगा दिए। इसी प्रयास का परिणाम था कि दो वर्षों के भीतर कॉलेज विद्यालय परिसर से निकलकर अपने भवन में आ गया। उन्होंने यह भी याद किया कि बचपन में उनके पास साइकिल नहीं थी और उन्होंने कॉलेज के चपरासी केदार की साइकिल से साइकिल चलाना सीखा। यह कहते हुए वे भावुक हो गए कि उनका पूरा बचपन इसी परिसर में बीता है। उन्होंने अपने पिता प्रो. बंगाली सिंह की उदारता, सहृदयता और मानवीय मूल्यों को भी याद किया।

 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष मोहन सिंह ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों और विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। वहीं पटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अबू बकर ने विश्वविद्यालय की ओर से कॉलेज के विकास और नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के संचालन में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि कॉलेज अपनी स्थापना के समय से ही ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्राचार्य डॉ. अखिलेश कुमार इस संस्थान को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए पूरी निष्ठा से प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने प्राचार्य का उत्साह बढ़ाते हुए कहा-

तू बेहतर है तो बेहतरीन की तलाश कर,

मिल जाए नदी तो समंदर की तलाश कर।

टूट जाते हैं शीशे पत्थर की चोट से,

टूट जाए पत्थर तू ऐसे शीशे की तलाश कर।

मंच पर मौजूद अन्य अतिथियों ने भी कॉलेज की उपलब्धियों की सराहना की और स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। समारोह में किसान कॉलेज, सोहसराय के प्राचार्य डॉ. दिव्यांशु कुमार, पूर्व कॉलेज निरीक्षिका डॉ. हेमलता सिंह, परीक्षा संचालक डॉ. मनोज कुमार, वाईबीएन विश्वविद्यालय, रांची के समाजशास्त्र विभाग के प्रो. डॉ. मनोज गोवर्द्धनपुरी, इतिहास विभाग के प्रो. डॉ. राजेंद्र प्रसाद, शिक्षा मंत्री के पीए बलराम सिंह सहित कई शिक्षाविद और गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डॉ. अखिलेश कुमार ने किया। मंच संचालन डॉ. श्वेता बाला ने किया, जबकि कॉलेज की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अंत में डॉ. विकास कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

समारोह में डॉ. राजीव कुमार रंजन, डॉ. गोरख राम, डॉ. संयुक्ता मयूरी, डॉ. ऋषिकेश, डॉ. कुमारी भारती, डॉ. अंकित और डॉ. अभय झा सहित महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदे मातरम्और कॉलेज के कुलगीत से हुई, जबकि समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

 

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।