नयी दिल्ली : आईडीबीआई बैंक के विनिवेश को लेकर जारी विवाद के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कांग्रेस तथा पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार पर निशाना साधा। सीतारमण ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में बैंकों और वित्तीय संस्थानों का इस्तेमाल निजी संस्थाओं की तरह किया तथा बैंक कर्मचारियों पर विवेकपूर्ण ऋण मानदंडों को दरकिनार कर कर्ज देने का दबाव बनाया। वित्त मंत्री ने अपने आरोपों के समर्थन में 1957 के हरिदास मूंदड़ा प्रकरण का उल्लेख किया। कांग्रेस नेताओं के प्रभाव के कारण हरिदास मूंदड़ा को एलआईसी से पैसा मिला।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 1976 में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकने पर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के तत्कालीन चेयरमैन आर. के. तलवार को पद से हटा दिया था। आईडीबीआई बैंक को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कही गयी बातों का जवाब देते हुए सीतारमण ने संजय गांधी से जुड़े मारुति ऋण मामले और 1980 के दशक में तत्कालीन वित्त राज्य मंत्री बी. जनार्दन पुजारी की भूमिका का भी उल्लेख किया।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में वित्त राज्य मंत्री रहे बी. जनार्दन पुजारी ने 1980 के दशक में बैंक कर्मचारियों पर ऋण जारी करने का दबाव डाला।’’

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के नाम लिखे एक पत्र को ‘एक्स’ पर साझा किया और बैंक की प्रस्तावित बिक्री को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस के समय में आईडीबीआई बना, देश का उद्योग खड़ा करने के लिए। (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी के समय में पहले बोली देखी गई, फिर दाम तय हुआ। कांग्रेस के समय बैंक बनते थे। मोदी के समय में बेचे जा रहे हैं। मैं आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूं।’’ वित्त मंत्री ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में मंत्री रहे पवन कुमार बंसल पर भी केनरा बैंक पर उनके परिवार से जुड़े व्यवसायों को कर्ज देने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘हमें आईडीबीआई बैंक खस्ताहाल स्थिति में सौंपा गया था क्योंकि आईडीबीआई को स्वयं कांग्रेस के नेताओं से घनिष्ठ संबंध रखने वाले वीडियोकॉन, विनसम, एबीजी शिपयार्ड, किंगफिशर जैसे बड़े व्यापारिक समूहों को ऋण देने के लिए मजबूर किया गया था। ये कर्ज, ‘फंसे ऋण’ में बदल गए, जिससे आईडीबीआई बैंक को भारी नुकसान हुआ…।’’
सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने पेशेवर प्रबंधन, विवेकपूर्ण नीतियों और 25,000 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी डालकर आईडीबीआई बैंक को पटरी पर लाया और बैंक अब विकास के अगले चरण के लिए तैयार है।
आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन की प्रक्रिया का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और सरकार इस बारे में पहले ही स्पष्टीकरण दे चुकी है। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सीतारमण ने कहा कि राफेल को लेकर उनके आरोप भी विफल हुए थे और आईडीबीआई मामले में भी ऐसा ही होगा। उन्होंने कहा, ”कांग्रेस के शासनकाल में बैंकिंग व्यवस्था में ताकतवर लोगों के लिए ‘फोनबुक’ और आम नागरिकों के लिए नियम-कायदे की किताब थी।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘कनेक्शन और सेटिंग वाली बैंकिंग’ का युग अब समाप्त हो गया है। आम लोगों की अब ऋण तक आसान पहुंच है और कर्मचारियों पर फोन पर ऋण देने का दबाव नहीं है।’’ उल्लेखनीय है कि सरकार ने रणनीतिक पुनर्गठन के तहत 14 अक्टूबर को आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को करीब 53,000 करोड़ रुपये (5.5 अरब अमेरिकी डॉलर) में बेचने की मंजूरी दी थी। यह किसी भारतीय बैंक में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश है।


