रुपये में आई गिरावट अस्थायी, मौजूदा स्तर से मजबूत होने की गुंजाइशः आरबीआई डिप्टी गवर्नर

आरबीआई डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि रुपये में हालिया गिरावट अस्थायी है और इसके मजबूत होने की गुंजाइश है।

Razi Ahmad
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मुंबई: 23 सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने बुधवार को कहा कि रुपये के मौजूदा स्तर से सिर्फ स्थिर होने ही नहीं, बल्कि मजबूत होने की भी गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल में रुपये में आई 13.1 प्रतिशत की गिरावट एक अस्थायी घटना हो सकती है।

गुप्ता ने यहां 13वें एसबीआई बैंकिंग एंड इकॉनमिक्स कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘रुपये के मौजूदा स्तर से सिर्फ स्थिर होने ही नहीं, बल्कि मजबूत होने का भी उचित आधार नजर आता है। जब पूंजी प्रवाह संबंधी उपायों की पहली बार घोषणा की गई थी, तब बाजार विश्लेषक भी इसी तरह की संभावना जता रहे थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इन सभी बातों को मिलाकर देखें तो पिछले डेढ़ साल में रुपये में आई कुल गिरावट (या इसे जरूरत से ज्यादा समायोजन कहें) को अस्थायी घटना माना जा सकता है।’’

गुप्ता ने कहा कि 31 मार्च, 2025 से 16 सितंबर, 2026 के बीच रुपये में बिंदु-दर-बिंदु आधार पर कुल 13.1 प्रतिशत की गिरावट आई है।

उन्होंने कहा कि भारत के चालू खाते के घाटा (कैड) में आने वाले वर्षों में और गिरावट आनी चाहिए। सेवाओं के निर्यात और विदेशों से धनप्रेषण की आवक जैसे पारंपरिक मजबूत पक्षों के साथ वस्तुओं के निर्यात में बढ़ोतरी से इसमें मदद मिलेगी।

गुप्ता ने कहा कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता भी वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और घरेलू तेल भंडार खोजने के प्रयासों से घट सकती है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष के बाद के हिस्से से पूंजी खाते में भी सुधार आने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू व्यापक आर्थिक बुनियाद, ऊंची जीडीपी वृद्धि, घरेलू निवेश चक्र, बैंकों एवं कंपनियों के मजबूत बही-खाते, पूंजी आकर्षित करने के उपाय तथा एफडीआई में बढ़ोतरी जैसे कारक पूंजी प्रवाह को समर्थन दे सकते हैं। भारतीय बॉण्ड को अधिक वैश्विक सूचकांकों में शामिल किए जाने से भी मदद मिल सकती है।

आरबीआई की डिप्टी गवर्नर ने कहा कि जून में लागू विशेष पूंजी प्रवाह उपायों से चालू वित्त वर्ष में भुगतान संतुलन में उल्लेखनीय अधिशेष आया है। उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित स्थिति बनाए रखने की आरबीआई की प्रतिबद्धता भी रुपये को समर्थन देने वाला महत्वपूर्ण कारक है।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।