झारखंड : एक करोड़ के इनामी नक्सली प्रशांत बोस समेत छह को न्यायिक हिरासत में भेजा गया जेल

News Aroma Media
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सरायकेला: पुलिस की गिरफ्त में आये एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली प्रशांत बोस समेत छह को रविवार को मेडिकल जांच के बाद सरायकेला कोर्ट में पेश किया गया।

कोर्ट से सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इनमें प्रशांत बोस, उसकी पत्नी शीला मरांडी, वीरेंद्र हांसदा, राजू टुडू, कृष्णा बाहदा और गुरुचरण बोदरा शामिल हैं।

पुलिस इन सभी को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। पुलिस के सामने अब तक जो बातें आयी हैं, उसके अनुसार प्रशांत बोस के संपर्क में कोल्हान के कई सफेदपोश भी थे, जो अपने काम नक्सली संगठन के माध्यम से कराते थे।

संगठन को वे रुपये और हथियार देकर मदद करते थे। इन सफेदपोशों में नक्सली इलाकों में ठेकेदारी करनेवाले बड़े-बड़े ठेकेदार और बिल्डर भी शामिल हैं। सभी प्रशांत बोस से मिलते-जुलते थे और उसके माध्यम से सब कुछ मैनेज करते थे।

वांटेड नक्सली की गिरफ्तारी के बाद से सफेदपोशों के होश उड़ गये हैं और सभी भूमिगत हो गये हैं। अपने-अपने माध्यम से नक्सली ने पुलिस को क्या कुछ कहा या बताया, इसकी जानकारी ले रहे हैं। हालांकि, पुलिस गोपनीय तरीके से अपना कार्य कर रही है।

प्रशांत बोस हुलिया बदलने में माहिर है। इस कारण वह कभी गिरफ्त में नहीं आ रहा था। कोल्हान के चाईबासा जिले में बलिवां और सारंडा में हुई पुलिस जवानों की हत्या के मामले का मास्टरमाइंड प्रशांत बोस ही था। उसके पास कई राज्यों के नक्सली नेताओं का आना-जाना होता था।

उल्लेखनीय है कि प्रशांत बोस झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में सीपीआई माओवादियों की गुरिल्ला आर्मी को कमांड करता था।

इन राज्यों के नक्सली नेताओं का आना-जाना और मिलना-जुलना प्रशांत बोस से था। वर्ष 2004 से पहले प्रशांत बोस एमसीसीआई का प्रमुख था।

उसकी पत्नी शीला मरांडी माओवादी संगठन की शीर्ष सेंट्रल कमिटी की सदस्य है। साथ ही वह नारी संघ की प्रमुख है।

प्रशांत बोस अपने प्रभाववाले क्षेत्र के कैडरों को एक राज्य से दूसरे राज्य प्रशिक्षण के लिए भेजता था। उससे बड़ी-बड़ी वारदातों को अंजाम दिलवाता था।

प्रशांत बोस ने वर्ष 2004 में संगठन को खड़ा किया। पीपुल्स वार ग्रुप एमसीसीआई यानी माओइस्ट कम्यूनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया का विलय किया था।

इसके बाद सीपीआई माओवादी स्थायित्व में आया। दोनों संगठन का विलय प्रशांत बोस के प्रयास से ही हुआ, जिससे संगठन की ताकत बढ़ती चली गयी। बताया गया है कि 70 से अधिक मामलों में वह वांछित रहा है।

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