जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम विधायक सरयू राय ने आरोप लगाया है कि लोकतंत्र का लबादा ओढ़कर, वामपंथी विचारधारा के संसर्ग में रहकर और विदेशों से चंदा प्राप्त कर कुछ तत्व देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। इनका उद्देश्य सरकार और संवैधानिक संस्थाओं को जनता की नजर में अविश्वसनीय बनाना तथा देश को फिर उसी राजनीतिक व्यवस्था की ओर ले जाना है, जिससे देश 2013 तक गुजर चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों से सरकार या प्रधानमंत्री को नहीं, बल्कि देश की एकता, स्थिरता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को खतरा है।

गुरुवार को एनडीए की ओर से नेताजी सुभाष चंद्र बोस (आमबागान) से जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) कार्यालय तक आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में शामिल होने के बाद मंच से संबोधित करते हुए सरयू राय ने कहा कि पिछले कुछ समय से देश में हो रही गतिविधियां कुछ तत्वों की वास्तविक मंशा को उजागर कर रही हैं। देश किस दिशा में आगे बढ़ेगा और उस दिशा का परिणाम देश की मजबूती के रूप में सामने आएगा या कमजोरी के रूप में, आज यही सबसे बड़ा सवाल है। राजनीतिक दल और संगठन अपनी-अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार कार्यक्रम कर रहे हैं, लेकिन देशहित सर्वोपरि होना चाहिए।

सरयू राय ने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव 2029 में होने हैं, लेकिन इंडी गठबंधन की गतिविधियां ऐसी हैं, मानो चुनाव अभी सामने खड़ा हो। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष प्रधानमंत्री को बीच में बदलने और उसके बाद चुनाव जीतकर सत्ता में आने की कल्पना कर रहा है। सत्ता में लौटने पर वही पुरानी नीतियां अपनाने की मंशा है, जिनका अनुसरण पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में होता रहा। उन्होंने कहा कि देश की बहुलतावादी प्रकृति को उसकी ताकत बनाने के बजाय कमजोरी के रूप में इस्तेमाल करने की राजनीति लंबे समय से होती रही है। इसी सोच के कारण सरकार को कई कठिन निर्णय लेने पड़े हैं।
सरयू राय ने एसआईआर जैसी प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता सूची में केवल उन्हीं लोगों के नाम होने चाहिए, जो मतदान के संवैधानिक अधिकार के पात्र हैं। उन्होंने अभिनेता इमरान खान का हवाला देते हुए कहा कि इमरान खान इस देश के नागरिक नहीं हैं। वह बाहर से आए हुए हैं और इस देश के संसाधनों का लाभ उठा रहे हैं। आज फिर से वैसे लोगों के मन में प्रतिक्रिया हो रही है, वो उग्र हो रहे हैं, जिनकी इस देश में चल नहीं रही है-2014 के बाद से। उन्होंने समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सरयू राय ने कहा कि कुछ समय पहले देश में ऐसी गतिविधियां देखने को मिलीं, जिनसे लगा कि कुछ तत्व नेपाल और बांग्लादेश जैसी परिस्थितियां भारत में भी पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने इन गतिविधियों को अराजकता फैलाने की कोशिश बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर ऐसी स्थिति बनाने का प्रयास किया गया, जिसमें सरकार कोई कठोर कार्रवाई न कर सके और प्रदर्शनकारी संसद तथा प्रधानमंत्री आवास जैसी संवेदनशील संस्थाओं तक पहुंचकर कब्जा करने की कोशिश करें।
सरयू राय ने कहा कि पहले वामपंथी और कम्युनिस्ट पार्टियां अराजकतावाद की विचारधारा में विश्वास करती थीं और अराजकता फैलाना उनके राजनीतिक दर्शन का हिस्सा था। लेकिन आज कुछ लोग लोकतंत्र का लबादा ओढ़कर, कम्युनिस्टों के संपर्क में रहकर और विदेशों से चंदा प्राप्त कर देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। यह केवल सरकार का विरोध नहीं, बल्कि सत्ता और लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता की नजर में अविश्वसनीय बनाने का सुनियोजित प्रयास है।
सरयू राय ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल को सरकार की नीतियों का विरोध करने का अधिकार है; लेकिन विरोध की भी एक सीमा और मर्यादा निर्धारित है। लोकतांत्रिक अधिकारों के नाम पर संवैधानिक व्यवस्था को चुनौती देना और अराजकता फैलाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व यह मानकर चल रहे हैं कि सरकार उनके विरुद्ध कोई कठोर कदम नहीं उठा सकती और वे अपनी मर्जी से कोई भी अप्रिय गतिविधि कर सकते हैं। अब जब उनके विरुद्ध कार्रवाई होती।


