भ्रष्टाचार का हो खुलासा: FCI मुख्यालय और उर्वरक मंत्रालय अनसोल्ड आइटम की सूची और वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करे, अधिकारिक वेबसाइट पर सूची और जानकारी उपलब्ध कराए

सिंदरी एफसीआई स्क्रैप नीलामी और अनसोल्ड सामग्री को लेकर आरटीआई कार्यकर्ताओं ने पारदर्शिता की मांग तेज की, करोड़ों के स्क्रैप की स्थिति और सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे

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मनोज मिश्रा

सिंदरी : एफसीआई के सिंदरी प्लांट से कबाड़ (Scrap) की बिक्री MSTC Limited (मिनी रत्न पीएसयू) के माध्यम से ई-नीलामी (E-auction) द्वारा की गई थी। अक्टूबर 2017 में जारी किए गए निविदा शर्तों के अनुसार सिंदरी खाद कारखाने के सभी पुराने संयंत्रों की निविदा के लिए 12 करोड़ रुपए सुरक्षित राशि रखी गई थी। वहीं पूरे स्क्रैप का आरक्षित मूल्य 170 करोड़ रुपए थे। नीलामी में भाग लेने वाले लोग पांच नवंबर 2017 तक स्क्रैप को देख सकते थे। वहीं, निविदा 7 नवम्बर 2017 को हुई। निविदा की सभी प्रक्रियाएं दिल्ली में की गई। इस निविदा में सिंदरी खाद कारखाने का बंद संयंत्र एसएमपी प्रोजेक्ट पावर प्लांट कोक, ओवेन संयंत्र, अमोनियम नाइट्रेट संयंत्र, अमोनियम बाई कार्बोनेट संयंत्र, सेंट्रल स्टोर्स आदि के स्क्रैप शामिल थे।

एमटीसी बिजनेस लिमिटेड, मुंबई ने नीलामी प्रक्रिया में 186 करोड़ रुपये में सिंदरी के स्क्रैप का ठेका हासिल किया था। कंपनी को दो साल में स्क्रैप उठा लेना था, और उन्होंने तय समय सीमा में स्क्रैब उठा लिया। स्क्रैप उठाने के लिए मार्च 2018 के पहले सप्ताह से ही एमटीसी अधिकारी-कर्मचारी सिंदरी पहुंच कारखाने के अंदर कटिंग शुरू कर दी थी और साल 2021 के पहले तिमाही तक स्क्रैब उठाया।

अनसोल्ड’ (न बिके हुए) स्क्रैप की जानकारी और बोलियां एफ़सीआईएल ([FCIL Official Website][FCIL]) की आधिकारिक निविदा (Tender) या नीलामी अनुभाग में उपलब्ध होती हैं। बाबजूद RTI के द्वारा जानकारी मांगने पर ‘अनसोल्ड’ (न बिके हुए) स्क्रैप की जानकारी नहीं दी जाती है। जानकारी के मुताबिक, करोड़ों का FCI sindri ईकाई में ‘अनसोल्ड’ (न बिकने वाले) स्क्रैप रखा गया था। सिंदरी ईकाई प्रबंधन से लेकर FCI मुख्यालय तक ‘अनसोल्ड’ (न बिकने वाले) आइटम की सूची मांगी गई, मीडिया ने भी पूछा लेकिन जबाव नहीं मिला। सवाल लाजमी है कि आखिर ‘अनसोल्ड’ (न बिकने वाले) आइटम कहां सुरक्षित है?

सिंदरीवासी ने सवाल उठाया है, वहीं RTI कार्यकर्ता भी सवाल उठा रहे हैं, सवाल लाजमी भी है। उवर्रक मंत्रालय और FCI मुख्यालय FCI sindri की ‘अनसोल्ड’ (न बिकने वाले) आइटम, स्क्रैप की सूची अधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराए। साथ ही यह भी जानकारी उपलब्ध कराए कि ‘अनसोल्ड’ (न बिकने वाले) आइटम फिलवक्त कहां हैं और किस स्थिति में है, बिक गए तो कब और कैसे तथा चोरी हुआ तो FIR दर्ज कराई गई या नहीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पार्दर्शिता पर बल देते हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अख्तियार करते हैं। FCI sindri के करोड़ों के ‘अनसोल्ड’ (न बिकने वाले) आईटम जिसे सुरक्षित रखा गया वे कौन-कौन आइटम हैं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है, इसपर लगातार सवाल उठे हैं और उठ रहे हैं।

सिंदरीवासियों का कहना है कि सवाल उठाने वाले पर मुकदमा दर्ज कर परेशान किया जाता है, पत्रकार को विभिन्न माध्यमों से धमकी दबाव बनाया जाता है, सीपी केस करवाया जाता है ताकी भ्रष्टाचार का खुलासा न हो। बीते दिनों एक RTI कार्यकर्ता को भ्रष्ट संपदा एवं प्रशासनिक अधिकारी एफसीआइएल सिंदरी ईकाई ने RTI दायर करने और सवाल पूछने के लिए उसे गार्ड भेजकर जबरन कार्यालय बुलाया, जिसको लेकर हो हंगामा हुआ और एफसीआइएल अधिकारी को माफी मांगनी पड़ी। CVC से जांच की मांग भी लगातार पत्राचार, ईमेल, रजिस्टर डाक से शिकायतवाद भेजकर किया जाता रहा है। प्रबंधन के खिलाफ स्थानीय लोगों ने धरना प्रदर्शन भी किया है और एफसीआइएल सिंदरी ईकाई प्रबंधक के कार्यकाल और संपत्ति की जांच की मांग लगातार की जा रही है।

गौरतलब हो कि FCI सिंदरी प्रशासनिक भवन तथा संपदा सह प्रशासनिक अधिकारी देवदास अधिकारी के आवास पर CCTV कैमरा नहीं लगाए गए हैं। जबकि, सीसीटीवी अनिवार्य होना चाहिये था। स्थानीय पुलिस को भी सुरक्षा के लिहाज से भी सीसीटीवी कैमरे लगवाने का सुझाव देना चाहिए था लेकिन पुलिस प्रशासन ने भी तबज्जो नहीं दिया। जबकि, श्री अधिकारी पुलिस से शिकायत करते रहे हैं कि उनके आवास पर लोग नारेबाजी, गालीगलौज करते हैं। अगर, सीसीटीवी कैमरे होते तो सबूत होता लेकिन सीसीटीवी सुरक्षा के लिहाज से भी नहीं लगाया गया है। सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाने का मकसद साफ है कि दिन के उजाले हो या रात के अंधेरे आने जाने वाले की पहचान छुपा रहे, काली कमाई का राज बना रहे। सीसीटीवी कैमरे सच बताएगा कि घरेलू काम के लिए एफसीआइएल सुरक्षा गार्ड और कर्मियों को कैसे श्री अधिकारी इस्तेमाल करते हैं। सीसीटीवी बताएगा कि जिस दागियों को धनबाद पुलिस जमीन पर बैठकर नसीहत नहीं चेतावनी देती हैकि सुधर जाओ नहीं तो जेल जाओ, वैसे दागी कैसे एफसीआइएल प्रबंधन के कार्यालय पर कुर्सी जमाता है, उसके गुर्गों भी तेवर से कुर्सी बैठते हैं। इसलिए, शायद सीसीटीवी कैमरे से ही किनारा कर लिया गया ताकि सबूत न मिले।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।