रांची: झारखंड के विश्वविद्यालय शिक्षकों के लिए एक बड़ी और राहतभरी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी रेगुलेशन-2010 के तहत प्रोन्नति पाने वाले राज्य के लगभग 900 विवि शिक्षकों को प्रोन्नति तिथि से ही वित्तीय लाभ देने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में राज्य सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद शिक्षकों को न्यूनतम 3.5 लाख रुपये से लेकर अधिकतम 11 लाख रुपये तक का बकाया एरियर मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पूरे झारखंड के विश्वविद्यालय शिक्षकों में खुशी और हर्ष का माहौल है।

क्या था पूरा विवाद
उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा 15 दिसंबर 2022 को एक अधिसूचना जारी की गई थी, जिसके तहत शिक्षकों को प्रोन्नति का वित्तीय लाभ अधिसूचना की तिथि से देने का प्रावधान किया गया था, न कि उनकी वास्तविक पात्रता या प्रोन्नति की तिथि से। इसके खिलाफ शिक्षकों ने कानूनी लड़ाई लड़ी। पूर्व में झारखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 17 मई 2024 को सरकार के इस प्रावधान को निरस्त करते हुए वास्तविक प्रोन्नति तिथि से ही एरियर देने का आदेश सुनाया था। इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।
ग्रेड पे के अनुसार मिलने वाली संभावित बकाया राशि (अनुमानित)
6000-7000 ग्रेड पे (संभावित वर्ष 2012): लगभग 3.5 लाख रुपये
7000-8000 ग्रेड पे (संभावित वर्ष 2017): लगभग 4.5 लाख रुपये
8000-9000 ग्रेड पे (संभावित वर्ष 2020): लगभग 7 लाख रुपये
9000-10000 ग्रेड पे (संभावित वर्ष 2020): 6 से 10 लाख रुपये तक


