
हजारीबाग : विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी ‘साहित्य, सभ्यता और संस्कृति की प्रयोजनीयता’ का आयोजन बड़े उत्साह के साथ हुआ। मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डा. जंग बहादुर पांडेय ने कहा कि साहित्य का अर्थ है “साथ और हित”-यानी वह ज्ञान जो मानव में एकता, नेकता और कल्याण का भाव जगाता है। डॉ. पांडेय ने आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, आचार्य शिवपूजन सहाय और आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के विचारों का हवाला देते हुए बताया कि साहित्य समाज को सुंदर बनाने, ज्ञान देने और नैतिक मूल्यों को सिखाने का सर्वोत्तम माध्यम है। उन्होंने मानस की चौपाइयों और ग्वाल कवि की रचनाओं का उल्लेख करते हुए साहित्य के विभिन्न लाभ गिनाए, जैसे कि-
एकता और नेकता का बोध कराना
विघटन नहीं, संघटन का संदेश देना
उत्तरदायित्व की भावना जगाना
जानकारी के साथ समझदारी का विकास
नालायक को लायक बनाना और कुमति को दूर करना
परहित की भावना का विकास
मानव मन को उर्ध्वगामी बनाना

डॉ. पांडेय ने कहा कि साहित्य मन का सुधार करता है और मानव जीवन में संस्कार, आचार और सद्भावना स्थापित करता है। उन्होंने संत कबीर और राष्ट्रकवि दिनकर के उद्धरणों से इसे और स्पष्ट किया। सभा में सेवा निवृत प्रधानाध्यापक डा. भोला नाथ कुशवाहा ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और यह मानव जीवन में संस्कार और सुविचार स्थापित करता है। उन्होंने धान रोपनी पर आधारित अपनी कविता सुनाई, जिससे श्रोतागण भाव विभोर हो गए। शाश्वत अतिथि डा. गोपाल शरण पांडेय ने साहित्य को मानवता का रक्षक बताया। हिंदी विभागाध्यक्ष डा. अनुज कुमार ने संगोष्ठी की सफलता की कामना की और साहित्य की प्रयोजनीयता पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर डा. जे. बी. पांडेय ने डा. सिकंदर प्रसाद को विद्यावाचस्पति (Ph.D.) और डॉ. दुलार हजाम को विद्यासागर (D.Litt) की मानद उपाधि प्रदान की। साथ ही डा. भोला नाथ कुशवाहा को हिंदी रत्न एवं अटल बिहारी साहित्यकार सम्मान से सम्मानित किया गया। श्रोताओं ने करतल ध्वनि से इन सम्मान समारोह का अनुमोदन किया। भद्रकाली कॉलेज इटखौरी के दर्शन शास्त्र के डॉ. राकेश कुमार सिन्हा और विशेश्वर यादव भी इस संगोष्ठी में शामिल हुए। स्वागत, मंगलाचरण और सरस्वती वंदना छात्रों ने की, फोटो ग्राफी डा. सुनील दूबे ने संभाली, संचालन डा. सुबोध सिंह शिवगीत और डॉ. के. के. गुप्ता ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डा. राजू राम ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम राष्ट्रगान और शांति पाठ के साथ संपन्न हुआ।

