पीएम मोदी ने कृषि कानूनों का किया मजबूती से बचाव, बोले- कानून रातों-रात नहीं आए

News Aroma Media
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भोपाल के किसान महासम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए तीनों कृषि कानूनों का मजबूती से बचाव किया।

उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते दौर में किसान, सुविधाओं के अभाव में असहाय होता जाए, ये स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती। पहले ही बहुत देर हो चुकी है।

जो काम 25-30 साल पहले हो जाने चाहिए थे, वो अब हो रहे हैं।

पिछले 6 साल में सरकार ने किसानों की एक-एक जरूरत को ध्यान में रखते हुए काम किया है।

उन्होंने कहा कि ये कृषि सुधार कानून रातों रात नहीं आए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कानूनों को लेकर कहा, बीते कई दिनों से देश में किसानों के लिए जो नए कानून बने, उनकी बहुत चर्चा है। ये कृषि सुधार कानून रातों-रात नहीं आए।

पिछले 20-22 साल से हर सरकार ने इस पर व्यापक चर्चा की है। कम-अधिक सभी संगठनों ने इन पर विमर्श किया है।

देश के किसान, किसानों के संगठन, कृषि एक्सपर्ट, कृषि अर्थशास्त्री, कृषि वैज्ञानिक, हमारे यहां के प्रोग्रेसिव किसान भी लगातार कृषि क्षेत्र में सुधार की मांग करते आए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने देश में पंजाब और हरियाणा के किसानों के आंदोलन के बीच इस आयोजित अहम सम्मेलन में कहा, सचमुच में तो देश के किसानों को उन लोगों से जवाब मांगना चाहिए जो पहले अपने घोषणापत्रों में इन सुधारों की बात लिखते रहे, किसानों के वोट बटोरते रहे, लेकिन किया कुछ नहीं।

सिर्फ इन मांगों को टालते रहे और देश का किसान, इंतजार ही करता रहा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर आज देश के सभी राजनीतिक दलों के पुराने घोषणापत्र देखे जाएं, उनके पुराने बयान सुने जाएं, पहले जो देश की कृषि व्यवस्था संभाल रहे थे, उनकी चिट्ठियां देखी जाएं, तो आज जो कृषि सुधार हुए हैं, वो उनसे अलग नहीं हैं।

जबकि किसानों के लिए समर्पित हमारी सरकार किसानों को अन्नदाता मानती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हमने फाइलों के ढेर में फेंक दी गई स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट बाहर निकाला और उसकी सिफारिशें लागू कीं, किसानों को लागत का डेढ़ गुना एमएसपी दिया।

किसान आंदोलन करते थे, प्रदर्शन करते थे लेकिन इन लोगों के पेट का पानी नहीं हिला।

इन लोगों ने ये सुनिश्चित किया कि इनकी सरकार को किसान पर ज्यादा खर्च न करना पड़े।

इनके लिए किसान देश की शान नहीं, इन्होंने अपनी राजनीति बढ़ाने के लिए किसान का इस्तेमाल किया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर भी इस दौरान निशाना साधते हुए कहा कि किसानों की बातें करने वाले लोग कितने निर्दयी हैं, इसका बहुत बड़ा सबूत है स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट।

रिपोर्ट आई, लेकिन ये लोग स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को आठ साल तक दबाकर बैठे रहे।

हर चुनाव से पहले ये लोग कर्जमाफी की बात करते हैं और कर्जमाफी कितनी होती है? कर्जमाफी का सबसे बड़ा लाभ किसे मिलता था? इन लोगों के करीबियों को।

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