
कुर्बानी का पैगाम देने वाला पर्व ईद-उल-अजहा (बकरीद) गुरुवार को पूरे अकीदत और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। शहर की विभिन्न ईदगाहों और मस्जिदों में सुबह विशेष नमाज अदा की जाएगी। नमाज के बाद हजरत इब्राहिम की सुन्नत को निभाते हुए कुर्बानी दी जाएगी। पर्व को लेकर शहर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और बाजारों में भी देर रात तक रौनक देखने को मिली।
ईदगाहों और मस्जिदों में तैयारियां पूरी
हरमू रोड ईदगाह, डोरंडा ईदगाह, बरियातू, बड़गाईं, हिंदपीढ़ी और कांके समेत शहर के विभिन्न इलाकों की मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज की तैयारी पूरी कर ली गई है। नमाज को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि पर्व शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके।
बकरा मंडियों में देर रात तक खरीदारी
बकरीद को लेकर बुधवार देर रात तक मेन रोड स्थित बकरा मंडी और अन्य अस्थायी बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी रही। अंजुमन प्लाजा के सामने, कांके रोड, डोरंडा, हिंदपीढ़ी और बड़गाईं इलाके की मंडियों में लोगों ने अपनी पसंद के बकरे खरीदे। मंडियों में इटावा, राजस्थानी और स्थानीय नस्ल के बकरे उपलब्ध थे। बकरों की कीमत 10 हजार रुपये से शुरू होकर 90 हजार रुपये तक पहुंच गई।
इस बार मंडियों में लाए गए दुबों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। कुछ दुबों की कीमत एक लाख रुपये तक बताई गई। उर्दू लाइब्रेरी, रतन टाकीज और मेन रोड इलाके में देर रात तक खरीदारी का दौर चलता रहा।
बकरीद की नमाज अदा करने का तरीका
बकरीद की नमाज दो रकअत की होती है, जिसमें अतिरिक्त तकबीरें कही जाती हैं। नमाज के दौरान सबसे पहले तकबीर-ए-तहरीमा कहकर हाथ बांधे जाते हैं और सना पढ़ी जाती है। इसके बाद कानों तक हाथ उठाकर तीन बार तकबीर कही जाती है। तीसरी तकबीर के बाद हाथ बांध लिए जाते हैं और पहली रिकअत पूरी की जाती है। दूसरी रिकअत में इमाम की किरअत सुनने के बाद तीन बार तकबीर कही जाती है और चौथी तकबीर पर रूकू किया जाता है।
परिवार के सदस्य की तरह पाला गया बकरा
कर्बला चौक निवासी सैयद रयान जावेद अपने दो साल के बकरे “जब्बार” को परिवार के सदस्य की तरह रखते हैं। उन्होंने बताया कि बकरा रोज सुबह बादाम और काजू खाता है। गर्मी से बचाने के लिए उसके लिए कूलर की व्यवस्था की गई है और उसे फिल्टर का पानी पिलाया जाता है।
कुर्बानी के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
धार्मिक विद्वानों ने अपील की है कि कुर्बानी के दौरान साफ-सफाई और सामाजिक सौहार्द का विशेष ध्यान रखा जाए। कुर्बानी का गोश्त तीन हिस्सों में बांटने और जरूरतमंदों तक पहुंचाने की भी सलाह दी गई है। साथ ही लोगों से कहा गया है कि नमाज के बाद ही कुर्बानी करें और दूसरे समुदाय की भावनाओं का सम्मान बनाए रखें।

