
Jharkhand Health Department : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में संचालित एंबुलेंस सेवाओं को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों पर नाराजगी जताई है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं को खटिया और बहंगी के सहारे अस्पताल पहुंचाने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और ऐसी स्थिति किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज, दवा और आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी जवाबदेही भी अधिक है।
एंबुलेंस मॉनिटरिंग के लिए बनेगा AI कंट्रोल रूम
मुख्यमंत्री ने एंबुलेंस सेवाओं की निगरानी के लिए AI आधारित कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना या आपातकालीन परिस्थितियों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, इसलिए एंबुलेंस सेवाओं को और अधिक तेज, प्रभावी तथा जवाबदेह बनाया जाना जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वास्थ्य संस्थानों से संबद्ध सभी एंबुलेंस पूरी तरह कार्यशील रहें और उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। साथ ही एंबुलेंस संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
मरीजों के प्रति संवेदनशीलता जरूरी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि चिकित्सा सेवाओं में मरीजों के प्रति संवेदनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने तकनीक के बेहतर उपयोग के माध्यम से एंबुलेंस सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण पर जोर दिया।
‘उबर मॉडल’ जैसी व्यवस्था पर भी होगा अध्ययन
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए उबर जैसी तकनीक आधारित परिवहन व्यवस्था का अध्ययन किया जाए। उन्होंने कहा कि भविष्य में आवश्यकता के अनुसार ऐसी व्यवस्था को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के हर नागरिक को समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

