रांची : कांके-पिठोरिया स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय केंद्र में नाग पंचमी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ। इस शुभ अवसर पर केंद्र परिसर में विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम, भव्य पूजन एवं महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों और श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत बीके राजमति बहन के मुखारविंद से नाग कथा एवं इसके गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों के वर्णन के साथ हुई।
बीके राजमती ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि नाग पंचमी केवल परंपरा या जीव-जंतुओं की पूजा मात्र का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मा के आंतरिक रूपांतरण और शुद्धिकरण का दिव्य संदेश देता है।
जिस प्रकार नाग में विष होता है, उसी प्रकार मनुष्य के मन में भी काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार रूपी विकारों का विष विद्यमान रहता है। परमात्मा शिव की याद और ज्ञान के द्वारा इन विकारों का त्याग कर जीवन को पवित्रता और शांति के अमृत से भरना ही सच्ची नाग पंचमी है।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव के गले में नाग इस बात का प्रतीक है कि ज्ञान और योग की शक्ति से मन की बुराइयों पर पूर्ण नियंत्रण पाया जा सकता है।
तत्पश्चात, मुख्य यजमान आशुतोष द्विवेदी की ओर से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान एवं पूर्ण निष्ठा के साथ नाग देवता की पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर नाग देवता का अत्यंत मनमोहक एवं भव्य श्रृंगार किया गया। यजमान आशुतोष द्विवेदी ने विधि-विधान से पूजन संपन्न करते हुए नाग देवता को दूध, अक्षत, धूप, दीप, सुगंधित पुष्प एवं ऋतु फल अर्पित किए।
इसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने एक साथ मिलकर भव्य श्रृंगार आरती में भाग लिया और संपूर्ण क्षेत्र की सुख, शांति, समृद्धि तथा आरोग्यता की मंगल कामना की।
उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष नाग पंचमी के शुभ अवसर पर कांके-पिठोरिया स्थित इस केंद्र में विशेष पूजा-अर्चना, श्रृंगार एवं धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है।
अनुष्ठान, कथा एवं भव्य आरती के समापन के पश्चात उपस्थित सभी श्रद्धालुओं एवं अतिथियों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसे सभी ने अत्यंत भाव और श्रद्धा के साथ ग्रहण किया।
इस अवसर पर संस्था की उर्मिला देवी, लीला देवी, कविता सिंह, सुधीर कुमार, पिंटू भाई समेत कई गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित थे।


