
Simaria News : पंचायती राज संस्थाओं के सफल मॉडल और ग्रामीण विकास योजनाओं का अध्ययन करने के उद्देश्य से बिहार के अरवल और औरंगाबाद जिलों से आए 40 चयनित मुखियाओं ने गुरुवार को चतरा जिले के सिमरिया प्रखंड का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न पंचायतों में संचालित विकास एवं आजीविका योजनाओं का अवलोकन किया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों के साथ अनुभव साझा किए।
सिमरिया प्रखंड कार्यालय के सभागार में आयोजित स्वागत समारोह में जिला पंचायती राज पदाधिकारी कुमारी वेदवंती और प्रखंड विकास पदाधिकारी चंद्र देव प्रसाद ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। कार्यक्रम में एदला और जांगी पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने भी अतिथियों का अभिनंदन किया।
बैठक के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी ने पंचायतों में संचालित विकास योजनाओं, पंचायती राज संस्थाओं की कार्यप्रणाली और विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी। अधिकारियों ने योजनाओं के क्रियान्वयन, जनभागीदारी और ग्रामीण विकास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
अध्ययन भ्रमण के तहत बिहार से आए मुखियाओं को ग्रामीण आजीविका और आय सृजन से जुड़े कई सफल मॉडल दिखाए गए। इनमें अभिसरण के माध्यम से स्थापित सरसों तेल निर्माण इकाई, एदला महिला आजीविका केंद्र, कोरी जांगी स्थित मनरेगा पार्क तथा कुट्टी बानासाडी में संचालित जेंडर रिसोर्स सेंटर प्रमुख रूप से शामिल रहे। इन परियोजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई।
जिला परिषद सदस्य देवनंदन साहू ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों के पंचायत प्रतिनिधियों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान स्थानीय विकास को नई दिशा देने में सहायक होता है। उन्होंने पंचायत स्तर पर नवाचारों और जनहितकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।
कार्यक्रम के बाद प्रतिनिधिमंडल ने एदला, बानासाडी और जांगी पंचायतों का दौरा कर विकास परियोजनाओं, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों और रोजगार सृजन गतिविधियों का निरीक्षण किया। अध्ययन भ्रमण के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों ने योजनाओं के संचालन और उनके सकारात्मक प्रभावों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के अंतरराज्यीय अध्ययन दौरे से पंचायत प्रतिनिधियों को नई कार्यप्रणालियों को समझने और अपने क्षेत्रों में बेहतर विकास मॉडल लागू करने का अवसर मिलता है। साथ ही यह स्थानीय प्रशासन और पंचायतों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी सहायक सिद्ध होता है।

