
JPSC JSSC Recruitment Controversy : झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी और चंपाई सोरेन ने भर्ती प्रक्रियाओं की CBI जांच कराने की मांग उठाई है।
चंपाई सोरेन ने झारखंड हाईकोर्ट से मामले का स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेने की अपील करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में JPSC और JSSC द्वारा कराई गई सभी भर्तियों की CBI से जांच कराई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को सरकारी संरक्षण नहीं, बल्कि कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच की मांग दोहराई। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के संरक्षण में ब्लैकलिस्टेड एजेंसियों के जरिए सरकारी नौकरियों की “नीलामी” की जा रही है, जिससे युवाओं के सपनों को लगातार कुचला जा रहा है।
चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार की सीआईडी जांच पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह कार्रवाई केवल “छोटी मछलियों को पकड़ने और बड़े लोगों को बचाने” के लिए की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में हुए कई मामलों में सीआईडी की भूमिका पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता से जुड़े लोगों के रिश्तेदार JPSC के इंटरव्यू बोर्ड तक में शामिल रहे हैं, जिससे जांच की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है। उनका कहना है कि जब आयोग के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों पर ही भ्रष्टाचार के आरोप हों और कई कर्मचारी गिरफ्तार किए जा चुके हों, तब राज्य एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना मुश्किल है।
बाबूलाल मरांडी ने भी कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल करने के लिए पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। भाजपा नेताओं का कहना है कि भर्ती घोटालों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

