नई दिल्ली : पद्म भूषण रामबहादुर राय शुक्रवार को 80 वर्ष के हो गये। इस अवसर पर उन पर लिखी गई पुस्तक “अस्सी के राय साहब” का लोकार्पण भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली के अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव थे।

राजनाथ सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि राय साहब अदम्य निष्ठा के साथ खड़े पत्रकारिता के पर्वत हैं। पत्रकार जितना सबल होगा लोकतंत्र उतना की प्रबल होगा।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में विश्वसनीयता महत्वपूर्ण है और यह पुस्तक भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के साथ हिंदी के प्रति सम्मान है। राजनाथ जी ने इस मौके पर हिंदी पत्रकारिता के इतिहास व आधुनिक पत्रकारिता के बहाने हिंदी पत्रकारिता के दो सौ साल को भी याद किया।
80 वर्ष के विशाल वृक्ष पत्रकारिता की चादर को कबीर की तरह निभाया, कहने की ताकत तुलसी की तरह निभाया और हिंदी को भारतेन्दु हरिश्चंद्र की तरह बढ़ाया। राय साहब शब्दों के साधक हैं। उनके लिए पत्रकारिता लोकसेवा का अवसर है। उनका रास्ता व्यवस्था परिवर्तन का है और वह समाज के मार्गदर्शक हैं। लोग पत्रकारिता को पेशे के तौर पर देखते है लेकिन यह विधा कलम के प्रति ईमानदार होने की सीख देता है।
उन्होंने कहा कि राय साहब के पास संसद में जाने का विकल्प था। इसके बावजूद वह पत्रकारिता की पाठशाला में अ से ज्ञ तक आए हैं। उनकी सच्ची पत्रकारिता कई बार अपने लोगों के ख़िलाफ़ भी खड़ी दिखाई देती है। इसने समय-समय पर विपक्षियों का साहस भी बढ़ाया।

राय साहब का जीवन जनांदोलनों का दस्तावेज है : हेमंत शर्मा
पुस्तक के संपादक व टीवी 9 के वरिष्ठ पत्रकार हेमन्त शर्मा ने इस मौके पर कहा कि राय साहब ने विचारधारा से प्रतिबद्ध रहकर भी अपनों के खिलाफ भी लिखते रहे। उनके न्यूज़ रूम में हर तरह के लोग होते हैं।
उन्होंने कहा कि वह इस किताब के विचार के ख़िलाफ़ थे। राय साहब की इस पुस्तक में कई लोगों के लेख प्रकाशित हुए कुछ के न हो सके। इस पुस्तक में राजनीति, समाज व पत्रकारिता के सवाल हैं। उनका कोई निजी जीवन नहीं है। जनांदोलनों का दस्तावेज है। उनका व्यक्तित्व सभी विचाधाराओं से निर्मित है। यह पुस्तक रामबहादुर राय के कृतित्व व व्यक्त्वि का झरोखा है।
धरातल के संघर्षों को लिखने वाले हैं राय साहब: भूपेंद्र यादव
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि रामबहादुर राय धरातल के संघर्षों से लिखने वाले पत्रकार हैं। आप सत्य के साथ खड़े रहते हैं। सत्य के प्रश्न आपने पत्रकारिता में किया है।
जिनमें साहबी नहीं, वह राय साहब हैं : बनवारी
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गांधीवादी वरिष्ठ पत्रकार बनवारी ने कहा कि जिनमें साहबी नहीं वह राय साहब हैं। राय साहब आत्मवंचना के लिए जाने जाते हैं। शील, निष्ठा एवं विनय भारतीय परंपरा में की मूल है। उन्होंने कहा कि मूलतः वह राजनीतिक व्यक्ति हैं। वह पत्रकार के रूप में पत्रकारीय मर्यादाओं का पालन करते हैं।
मेरा स्वधर्म लिखना, पढ़ना और जानना है : रामबहादुर राय
इस मौके पद्म विभूषण राय साहब ने कहा कि आयोजन से मेरी पूरी असहमति है। मैं हेमन जी के पिंजरे का पक्षी हो गया हूँ। उन्होंने प्रहसन करते हुए कहा कि हेमंत जी ने राजनाथ जी को और भूपेन्द्र जी को फुसला लिया तो मैं किस खेत का मूली हूं। स्वधर्म की बात करते हुए कहा कि मेरा स्वधर्म लिखना पढ़ना और जानना है। अस्वस्थता के कारण अपनी कुछ जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मोदी मार्ग और गांधी मार्ग जहां मिलते हैं , वह पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मार्ग है।


