
पटना: रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. जेबी पाण्डेय ने कहा कि तस्वीरें और स्मृतियां कई बार बिना बोले भी बहुत कुछ कह जाती हैं। इसी भावना के साथ वे वाईबीएन विश्वविद्यालय रांची के समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज गोबर्द्धनपुरी के साथ पटना स्थित पूर्व सांसद डॉ. शंकर दयाल सिंह स्मृति पुस्तकालय पहुंचे और वहां का अवलोकन किया। डॉ. जेबी पाण्डेय ने कहा कि जीवन में कुछ स्थान ऐसे होते हैं, जहां जाना केवल औपचारिकता नहीं बल्कि आत्मिक अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय, विद्यालय, शिक्षकालय और देवालय जैसे स्थानों का महत्व हमेशा बना रहता है। यही कारण है कि वे डॉ. शंकर दयाल सिंह स्मृति पुस्तकालय पहुंचे और वहां बिताए समय को यादगार बताया।
पुस्तकालय पहुंचकर डॉ. पाण्डेय ने वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और प्रबंधक श्री वीरेंद्र प्रसाद सिंह से मुलाकात की। उन्होंने पुस्तकालय के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। डॉ. जेबी पाण्डेय ने डॉ. शंकर दयाल सिंह को याद करते हुए कहा कि वे योग्य पिता स्व. कामता प्रसाद सिंह के योग्य पुत्र थे। वे साहित्य के प्रति समर्पित व्यक्ति और अनन्य साहित्य साधक थे। डॉ. पाण्डेय ने कहा कि उन्हें डॉ. शंकर दयाल सिंह को देखने, सुनने और पढ़ने का अवसर मिला था।
उन्होंने कहा कि आज उनके नाम पर बने पुस्तकालय में पहुंचने के बाद उनसे जुड़ी कई पुरानी यादें अचानक आंखों के सामने ताजा हो गईं। उनके समसामयिक लेख और समाचार पत्रों में प्रकाशित होने वाले नियमित कॉलम काफी लोकप्रिय रहे। वहीं उनकी चर्चित पुस्तक ‘आपातकाल क्या सच, क्या झूठ‘ ने देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बनाई थी।
इस अवसर पर पुस्तकालय के प्रबंधक वीरेंद्र प्रसाद सिंह ने डॉ. जेबी पाण्डेय और डॉ. मनोज गोबर्द्धनपुरी का स्वागत किया। उन्होंने डॉ. शंकर दयाल सिंह की लोकप्रिय पुस्तक ‘राजनीति की धूप: साहित्य की छांव‘ और पुष्प गुच्छ भेंट कर अतिथियों का सम्मान किया। डॉ. जेबी पाण्डेय ने वीरेंद्र प्रसाद सिंह के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा-
“जीवन में पग-पग पर आप,
करें कार्य नित मंगलकारी।
और सफल हों यश पाएं,
यही कामना सदा हमारी।”

