

नयी दिल्ली: सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अब गर्मी की छुट्टियों से पहले कम से कम 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम पूरा करने की तैयारी करनी होगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में मौखिक निर्देश दिए हैं। इससे शिक्षकों के सामने पहले की तुलना में कम समय में कोर्स पूरा करने की चुनौती बढ़ सकती है।





दरअसल, स्कूलों में एक शैक्षणिक वर्ष में न्यूनतम 222 शिक्षण दिवस का प्रावधान है, लेकिन शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा कई अन्य सरकारी और प्रशासनिक कार्यों में भी लगाया जाता है। इस वर्ष जनगणना, विभिन्न सर्वेक्षणों और आगामी चुनावों की तैयारियों के कारण शिक्षकों की ड्यूटी लगने की संभावना अधिक है। ऐसी स्थिति में वास्तविक शिक्षण दिवस 150 दिनों से भी कम रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।
इन्हीं संभावित परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शिक्षकों से पाठ्यक्रम प्रबंधन बेहतर करने और समय रहते पढ़ाई को गति देने की सलाह दी है। हालांकि शिक्षकों का कहना है कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों, स्कूल से जुड़े प्रशासनिक कार्यों और अन्य जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई को संतुलित रखना आसान नहीं होगा। ऐसे में यदि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से कुछ राहत दी जाए तो शिक्षण कार्य पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।
पिछले वर्षों में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को मिलने वाली निशुल्क पाठ्यपुस्तकें अक्सर जुलाई तक पहुंचती थीं, जिससे सत्र की शुरुआती पढ़ाई प्रभावित होती थी। इस बार स्थिति बेहतर दिखाई दे रही है, क्योंकि नया सत्र शुरू होने से पहले ही कई जिलों में किताबों की आपूर्ति शुरू हो गई है।
राजपुरा स्थित जिला वितरण केंद्र में कक्षा 1 और 2 की पुस्तकें पहुंच चुकी हैं। कक्षा 1 के लिए ‘सारंगी’ और ‘मृदंग’ की 2500-2500 तथा ‘आनंदमय गणित’ की 2400 पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं कक्षा 2 के लिए ‘सारंगी’ और ‘मृदंग’ की 1700-1700 तथा ‘आनंदमय गणित’ की 1600 किताबें सप्लाई की गई हैं। इससे उम्मीद है कि बच्चों को सत्र की शुरुआत में ही किताबें मिल जाएंगी और पढ़ाई समय पर शुरू हो सकेगी।
