
Netarhat News : झारखंड की “क्वीन ऑफ छोटानागपुर” कहे जाने वाले नेतरहाट की चमक फीकी पड़ रही है। कागजों पर इसे विश्वस्तरीय पर्यटन हब बनाने के करोड़ों के दावे हैं, लेकिन जमीन पर नेतरहाट पंचायत के ग्रामीण आज भी 21वीं सदी की बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं।
सिरसी-नेतरहाट मार्ग बना मौत का रास्ता
पर्यटकों और ग्रामीणों को जोड़ने वाली सबसे अहम सिरसी-नेतरहाट सड़क आज पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़ी हुई सड़क और बाहर निकले नुकीले पत्थर इस रास्ते को जानलेवा बना चुके हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है – इस रोड पर गाड़ी चलाना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल है। एक गलती और सीधे खाई में।बारिश के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। कीचड़ और फिसलन की वजह से कई बार हादसे हो चुके हैं।
इलाज के अभाव में जूझती जिंदगियां
सड़क की बदहाली का सबसे बड़ा खामियाजा बीमार और गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है आपातकाल में एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। मजबूरी में ग्रामीण मरीज को खाट, बाइक या कंधे पर लादकर कई किलोमीटर पैदल ले जाने को मजबूर हैं। कई बार समय पर अस्पताल न पहुंच पाने की वजह से अनहोनी भी हो चुकी है।
दौरे हुए, दावे हुए, समाधान नहीं हुआ
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कुछ सालों में नेतरहाट में जिला प्रशासन, मंत्री और मुख्यमंत्री तक के दौरे हो चुके हैं। फाइलों में सड़क निर्माण और पर्यटन विकास के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं भी हुईं। लेकिन धरातल पर कुछ नहीं बदला।एक ग्रामीण ने कहा – नेता आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, वादा करके चले जाते हैं। वोट के बाद कोई मुड़कर नहीं देखता।
ग्रामीणों की मांग
गांव वालों ने सरकार से मांग की है कि चुनावी वादों से पहले सिरसी-नेतरहाट मार्ग को प्राथमिकता से बनवाया जाए। साथ ही पेयजल, बिजली की व्यवस्था भी दुरुस्त की जाए।

