झारखंड

… और इस तरह एक फोन कॉल ने UG NEET पेपर लीक मामले का कर दिया खुलासा

पिछले दिनों की जांच में या स्पष्ट रूप से पता चल गया है कि एक फोन कॉल ने UG NEET पेपर लीक कांड का खुलासा कर दिया।

NEET UG Paper Leak : NEET UG पेपर लीक (Paper Leak) मामले में जब से CBI ने जांच की जिम्मेदारी संभाली है, तब से बहुत कुछ नया खुलासा रोज हो रहा है।

पिछले दिनों की जांच में या स्पष्ट रूप से पता चल गया है कि एक फोन कॉल ने UG NEET पेपर लीक कांड का खुलासा कर दिया।

जांच से पता चला है कि पटना के शास्त्रीनगर नगर पुलिस को फोन से सूचना मिली कि चार बदमाश एक SUV से अपने ठिकाने की ओर जा रहे हैं। लेकिन फोन करने वाले ने अपना नाम नहीं बताया।

तब पुलिस का शक गहरा होने लगा। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चारों युवकों को पकड़ लिया।

पकड़े गए नीट अभ्यर्थियों ने किया बड़ा खुलासा

पूछताछ करने पर चारों युवकों ने बताया कि वे NEET UG की परीक्षा में उम्मीदवारों को शामिल कराने ले जा रहे थे।

उम्मीदवारों को रामकृष्ण नगर में ठहराया गया था। वहां पुलिस ने छापेमारी की तो  यूजी नीट की परीक्षा देने वाले 30 उम्मीदवार पकड़े गए।

बच्चों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने नीट के लीक पेपर और उसके जवाब के लिए 30 से 35 लाख रुपए दिए हैं।

यहां उन्हें प्रश्न पत्र और आंसर शीट दिया जाना था। रात भर में सारे जवाब रटाए जाने थे। इसके बाद पटना पुलिस के कान खड़े हो गए।

पुलिस ने इस मामले में अनुसंधान को आगे बढ़ते दानापुर नगर परिषद के जूनियर इंजीनियर सिकंदर यादवेंद्र सहित और नौ लोगों को हिरासत में ले लिया।

सिकंदर यादवेंद्र ने किया यह खुलासा

सिकंदर यादवेंद्र ने पुलिस के पास पूछताछ के क्रम में स्वीकार किया कि चार मई को उम्मीदवारों को प्रश्न के उत्तर रटाए जाने थे।

उन्हें परीक्षा केंद्र छोड़ने का काम सौंपा गया था। इसके बाद इस गिरोह के सदस्यों ने ठिकाना बताया था। पुलिस ने छापेमारी की।

वहां पुलिस को पटना सेफ हाउस में 13 रोल नंबर मिले। घंटे भर के अंदर पुलिस नीट परीक्षा केदों पर पहुंच गई। पांच मई को परीक्षा हुई।

6 मई को सिकंदर यादवेंद्र के घर पुलिस ने जब छापा मारा तो वहां जले हुए प्रश्न पत्र मिले। पुलिस को पूरा इनपुट मिलने लगा तो पुलिस ने 13 लोगों को हिरासत में ले लिया।

फिर मामला बिहार आर्थिक अपराध इकाई को सौंप दिया गया। इसमें कई बड़े खुलासे किए। अनेक लोगों को गिरफ्तार किया। इसी बीच जांच का जिम्मा अब सीबीआई के हवाले है।

CBI EOU के सहयोग से जांच में तेजी से आगे बढ़ रही है।

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