रांची में बवाल! आजसू का जोरदार विरोध, ‘क्लस्टरिंग सिस्टम’ पर भड़का विवाद-नोटिफिकेशन फाड़ा और जलाया

रांची विश्वविद्यालय में आजसू ने क्लस्टरिंग सिस्टम के खिलाफ जोरदार विरोध किया। नोटिफिकेशन फाड़कर जलाया गया और इसे छात्र, शिक्षक व झारखंड की शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ बताया गया।

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रांचीः रांची विश्वविद्यालय परिसर में सोमवार को आजसू ने “Restructuring एवं Clustering System” से जुड़े संकल्प के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। कार्यकर्ताओं ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए नोटिफिकेशन फाड़ा और जलाकर प्रदर्शन किया। साथ ही कुलपति महोदया को विरोध पत्र सौंपते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की गई। आजसू की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी संकल्प पत्रांक–05/प0-13/2023 – 902, संकल्प पत्रांक–05/प0-06/2023 – 893 सहित अन्य आदेशों के जरिए रांची विश्वविद्यालय और इसके अंतर्गत आने वाले अंगीभूत कॉलेजों तथा अन्य विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों के “Restructuring” और “Clustering System” को लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है। आजसू ने इस प्रस्ताव को राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था, छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और झारखंड की भाषाई-सांस्कृतिक पहचान के खिलाफ बताया है। संगठन ने इसे अव्यावहारिक और जनविरोधी करार देते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की।

गरीब और ग्रामीण छात्रों पर पड़ेगा असर

आजसू का कहना है कि झारखंड के अधिकतर छात्र ग्रामीण, आदिवासी, दलित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। ऐसे में क्लस्टरिंग सिस्टम लागू होने पर उन्हें अलग-अलग कॉलेजों में विषय के अनुसार जाना पड़ेगा, जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ेगा और कई छात्र पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं।

छात्राओं की शिक्षा पर संकट

संगठन ने यह भी कहा कि ग्रामीण परिवारों की छात्राएं केवल नजदीकी कॉलेजों में ही पढ़ाई कर पाती हैं। दूर कॉलेज जाने की मजबूरी से उनकी शिक्षा प्रभावित होगी और महिला शिक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा।

NEP-2020 के खिलाफ बताया प्रस्ताव

आजसू ने कहा कि यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के भी खिलाफ है, जो बहुविषयी शिक्षा को बढ़ावा देती है। जबकि प्रस्तावित सिस्टम कॉलेजों को विषय-आधारित इकाइयों में बांट देता है, जो शिक्षा के व्यापक स्वरूप को कमजोर करेगा।

कॉलेजों की पहचान और पदों पर संकट

संगठन ने चेतावनी दी कि पुराने और स्थापित कॉलेजों की बहुविषयी पहचान खत्म हो जाएगी। साथ ही शिक्षकों और कर्मचारियों के पदों में कटौती और सरेंडर के प्रस्ताव से शिक्षा व्यवस्था और कमजोर होगी।

जनजातीय भाषाओं पर भी खतरा

आजसू ने कहा कि इस व्यवस्था से संताली, हो, खड़िया, कुड़ुख, मुंडारी, नागपुरी, पंचपरगनिया, खोरठा और कुड़माली जैसी भाषाओं के विभागों पर असर पड़ेगा। नामांकन घटने से ये विभाग धीरे-धीरे कमजोर हो सकते हैं, जिससे झारखंड की सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को नुकसान होगा।

संगठन की मांगें

  • क्लस्टरिंग और रीस्ट्रक्चरिंग सिस्टम तुरंत वापस लिया जाए
  • सभी कॉलेजों में कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय यथावत रहें
  • भाषाई विभागों को सुरक्षित रखा जाए
  • पदों की कटौती रोकी जाए और नई नियुक्तियां की जाएं
  • किसी भी बदलाव से पहले सभी हितधारकों से चर्चा की जाए

विरोध में शामिल रहे कई नेता और कार्यकर्ता

ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव, प्रदेश सचिव राजेश सिंह, रोशन नायक, सक्षम झा, महानगर अध्यक्ष अमन साहू, निशांत लिंडा, पंकज, पीयूष, मोहन कुमार, अब्दुल खान, यश सोनी, अभिषेक, राज दुबे, रूपम, सुष्मिता कुमारी, खुशी कुमारी, लिजा बेक, प्राची खलखो, फुलमनी कुमारी, नयना कुमारी, सती कुमारी, मनीषा कुमारी, प्रीति कुमारी, रेशमा कुमारी, गीता, सोनी, मनिता, काजल समेत कई लोग मौजूद रहे।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।