जो गाड़ियां चलने लायक उसे भी फेंक दिया कबाड़ में, केवल नई गाड़ियों की खरीदारी पर निगम का फोकस

रांची नगर निगम के स्टोर में खड़े वाहन और संसाधन कबाड़ में बदल रहे हैं। रखरखाव की लापरवाही और नई खरीदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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बकरी बाजार स्थित स्टोर में खड़े-खड़े बर्बाद हो रहे निगम के संसाधन

स्क्रैप के बीच अच्छी गाड़ियों को भी खपाने का चल रहा खेल

VIVEK SHARMA

रांची: नगर निगम में जनता के टैक्स के पैसों की अंधाधुंध बर्बादी हो रही है। संसाधनों के रखरखाव में भारी लापरवाही के कारण इस्तेमाल होने वाली गाड़ियां भी कबाड़ में तब्दील हो रही है। ये हम नहीं बल्कि स्टोर में खड़ी गाड़ियां खुद बयां कर रही है। बकरी बाजार स्थित निगम के स्टोर में खड़े-खड़े कई वाहन और संसाधन कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। आरोप है कि मामूली खराबी वाली या पूरी तरह चलने लायक गाड़ियों को भी जानबूझकर स्क्रैप घोषित किया जा रहा है, ताकि नई गाड़ियों की खरीदारी का रास्ता साफ हो सके।

स्टोर में सड़ रहे करोड़ों के संसाधन

बकरी बाजार स्टोर परिसर में नगर निगम की दर्जनों गाड़ियां, जिनमें कचरा उठाने वाले वाहन, सफाई करने वाले वाहन और अन्य मशीनें शामिल हैं जो लंबे समय से एक ही जगह खड़ी-खड़ी धूल फांक रही हैं। रखरखाव और समय पर मरम्मत न होने के कारण ये गाड़ियां धीरे-धीरे जर्जर होती जा रही हैं। कई गाड़ियों को दूसरी गाड़ियों के पार्ट्स डालकर भी चलने लायक बनाया जा सकता है। लेकिन निगम का ध्यान इस ओर नहीं है।

कबाड़ के खेल के पीछे नई खरीदारी का खेल

विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो कबाड़ के नाम पर अच्छी स्थिति वाली गाड़ियों को भी खपाने का खेल चल रहा है। स्क्रैप घोषित गाड़ियों के बीच अच्छी गाड़ियों को खपाया जा रहा है। जिससे कि किसी का ध्यान उसपर न रहे। पुरानी गाड़ियों की मरम्मत कराकर उन्हें दोबारा सड़क पर उतारने के बजाय निगम का पूरा जोर नई गाड़ियों के टेंडर और खरीदारी पर है। नई खरीद प्रक्रिया में बड़े बजट का प्रावधान होता है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर निजी लाभ साधने की गुंजाइश बनी रहती है।

नई खरीदारी से बढ़ रहा बोझ

जो गाड़ियां केवल छोटे-मोटे स्पेयर पार्ट्स या सामान्य रिपेयरिंग के दम पर चालू की जा सकती हैं, उन्हें वर्कशॉप भेजने के बजाय सीधे बकरी बाजार के यार्ड में खड़ा कर दिया जाता है। इस लापरवाही के कारण शहर की सफाई और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वहीं राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है सो अलग। नई खरीदारी के नाम पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ सरकारी खजाने पर डाला जा रहा है। जबकि निगम के पास राजस्व लोगों के द्वारा दिए गए टैक्स से आता है। जिसमें सफाई से लेकर निगम का पेमेंट भी किया जाता है। ऐसे में मिलने वाला राजस्व भी कम पड़ रहा है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।